feasibility study in software engineering in hindi

What is Feasibility Study in Hindi?

Definition of Feasibility Study in Software Engineering Hindi :- फीज़ेबिलिटी शब्द का हिंदी में अर्थ व्यवहार्यता या संभाव्यता होता है अर्थात यह किसी काम के सफल होने की संभावना से सम्बंधित है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में Feasibility Study के अंतर्गत इस बात का अध्ययन किया जाता है की किसी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट के असफल या फेल होने के कौन-कौन से कारण हो सकते है  अर्थात वह सभी संभावनाएं जो किसी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट को असफल बना सकती है, उनका अध्ययन फीज़ेबिलिटी स्टडी के अंतर्गत किया जाता है।

Feasibility study की प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर इंजीनियर के द्वारा कोडिंग की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले ही System Analyst के टीम के द्वारा किया जाता है एवं इस बात का अनुमान लगाने का प्रयास किया जाता है कि वह कौन से कारण है जो इस विशिष्ट परियोजना को असफल बना सकती है। यह एक सफल सॉफ्टवेयर परियोजना के निर्माण में बहुत अधिक मददगार चरण होता है।

Who will conduct feasibility study In Hindi (फीज़ेबिलिटी स्टडी की प्रक्रिया को किसके द्वारा किया जाता है?):- फीज़ेबिलिटी स्टडी की प्रक्रिया को आमतौर पर System Analyst (सिस्टम एनालिस्ट) के द्वारा किया जाता है। लेकिन कई बार आवश्यकता पड़ने पर इसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर अर्थात कोडर, प्रोजेक्ट मैनेजर, सॉफ्टवेयर टेस्टर, ग्राहक एवं ग्राहक के कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी जो सॉफ्टवेयर उत्पाद पर काम करने वाले हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है। किस प्रोजेक्ट सफलता के लिए यह बहुत आवश्यक है की फीज़ेबिलिटी स्टडी के सभी रूपों का ही प्रोजेक्ट निर्माण से पहले ही पालन किया जाए अन्यथा बहुत सारा पैसा एवं समय बर्बाद हो सकता है।

When to do Feasibility study In Hindi (फीज़ेबिलिटी स्टडी की प्रक्रिया को कब किया जाता है?):- फीज़ेबिलिटी स्टडी की प्रक्रिया को Software Development Life Cycle (SDLC) के दूसरे चरण के दौरान किया जाता है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफ साइकिल के पहले चरण में ग्राहक के जरूरतों को इकठा किया जाता है, इसके बाद ही फीज़ेबिलिटी स्टडी की प्रक्रिया को किया जाता है।

Types of Feasibility Study in Hindi

Types of Feasibility Study in Hindi:- फीज़ेबिलिटी स्टडी के कुछ प्रमुख रूप निम्नलिखित रूप से है :-

  1. Technical feasibility :- टेक्नीकल फीज़ेबिलिटी के अंतर्गत यह मूल्यांकन किया जाता है की जिस प्रस्तावित प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है उसे वर्तमान स्तर के तकनीकी संसाधनों का उपयोग करके बनाया जा सकता है की नहीं। इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे प्रोजेक्ट निर्माण के लिए उपयोग होने वाले सभी तकनीकों का विश्लेषण किया जाता है और यह मूल्यांकन किया जाता है की प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट एवं इम्प्लीमेंटेशन के लिए चुने गए सभी तकनीकी संसाधन प्रोजेक्ट की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है या नहीं।
  2. Economic feasibility :- इकोनॉमिक फीज़ेबिलिटी के अंतर्गत यह मूल्यांकन किया जाता है की सॉफ्टवेयर परियोजना के विकास, कार्यान्वय एवं परिचालन पर जो खर्च आने वाला है, वह संगठन द्वारा आवंटित बजट के अंदर है या नहीं। इसमें सॉफ्टवेयर के निर्माण के लिए जिन तकनीकों का उपयोग किया जायेगा उनका मूल्य, सॉफ्टवेयर इंजीनियर एवं प्रोजेक्ट के जुड़े हुए सभी कर्मचारियों का खर्च, सॉफ्टवेयर को इनस्टॉल करने के लिए उपयोग होने वाले हार्डवेयर एवं अन्य मशीनों का खर्च सबका विस्तृत विश्लेषण किया जाता है।
  3. Behavioural feasibility :- बेहवियरल फीज़ेबिलिटी के अंतर्गत ग्राहक एवं ग्राहक के संगठन में काम करने वाले कर्मचारी जो इस सॉफ्टवेयर प्रणाली का उपयोग करेंगे उनके दृष्टिकोण या व्यवहार का मूल्यांकन करके यह अनुमान लगाया जाता है कि कर्मचारियों की योग्यता कैसी है, उन्हें नए सॉफ्टवेयर प्रणाली का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है या नहीं। इसके साथ ही बेहवियरल फीज़ेबिलिटी में यह निर्धारित करने का प्रयास किया जाता है की नए प्रणाली से ग्राहक के वर्तमान व्यवसायिक पद्धति पर कोई दुष्प्रभाव तो नहीं पड़ेगा ।
  4. Operational Feasibility:- ऑपरेशनल फिजिबिलिटी इस बात का विश्लेषण किया जाता है की प्रस्तावित सॉफ्टवेयर प्रणाली कितनी अच्छी तरह से ग्राहक की समस्याओं को हल करती है और ग्राहक के संगठन की जिन आवश्यकताओं की पहचान की गई थी प्रस्तावित सॉफ्टवेयर प्रणाली उन सभी आवश्यकताओं का समाधान करने में सक्षम है या नहीं।
  5. Legal feasibility :- लीगल फीज़ेबिलिटी के अंतर्गत यह आकलन किया जाता है कि प्रस्तावित सॉफ्टवेयर परियोजना सभी प्रकार से घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनी नियमों का ठीक से समर्थन करता हो एवं किसी भी कानूनी नियमों का उल्लंघन ना करता हो। इसमें ग्राहक की आवश्यकता एवं प्रस्तावित प्रोजेक्ट का कानूनी दृष्टिकोण से विश्लेषण किया जाता है तथा यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि इस प्रोजेक्ट के निर्माण से किसी भी प्रकार की कानूनी नियमों का उल्लंघन ना होता हो।
  6. Time feasibility :- किसी भी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट को तभी सफल माना जाता है अगर वह सही समय पर बनकर उपलब्ध हो। अगर प्रोजेक्ट सही समय पर बनकर तैयार ना हो पाए या प्रोजेक्ट के निर्माण में ज्यादा समय लग जाए तो कई बार ग्राहक की आवश्यकताएं ही बदल जाए या ग्राहक के लिए इस प्रोजेक्ट का कोई उपयोग ही नहीं रह जाता। ऐसी अवस्था में पूरा प्रोजेक्ट ही फेल हो जाता है। इसलिए Time feasibility के अंतर्गत इस बात का विश्लेषण किया जाता है कि क्या यह सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट सही समय पर बनकर तैयार हो पायेगा या नहीं एवं प्रोजेक्ट के निर्माण में जो समय लगेगा उस समय के बीच ग्राहक की आवश्यकता में कोई परिवर्तन तो नहीं हो जाएगा।

Advantages and Disadvantages of Feasibility Study in Software Engineering Hindi

Advantages of Doing Feasibility Study in Hindi:-

  • वह सभी कारण जो किसी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट को सफल बना सकते हैं, उन्हें प्रोजेक्ट निर्माण की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले ही दूर करने में मदद करता है।
  • यह किसी परियोजना से जुड़े हुए सदस्यों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करता है।
  • यह प्रोजेक्ट से जुड़े हुए सभी सदस्यों की एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है।
  • यह प्रोजेक्ट में छुपे हुए नए अवसरों की पहचान करने में मदद करता है।
  • यह भविष्य में पैदा हो सकने वाले कानूनी दिक्कतों से पहले ही सावधान कर देता है।
  • प्रोजेक्ट एवं व्यापार संबंधी सभी संभव विकल्पों को ढूंढने में मदद करता है।

Disadvantages of Doing Feasibility Study in Hindi:-

  • प्रोजेक्ट निर्माण में इस चरण को जोड़ने के कारण प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में लगने वाला समय एवं लागत बढ़ जाता है ।
  • प्रोजेक्ट निर्माण के काम को शुरू करने से पहले ही सभी प्रकार के खतरों का पता लगाना या उनका अनुमान लगाना बहुत ही कठिन प्रक्रिया है और ऐसा आवश्यक नहीं कि सभी संभावित खतरों का पहले ही पता चल जाए। कई बार फीज़ेबिलिटी स्टडी के चरणों को करने के बाद भी प्रोजेक्ट निर्माण की प्रक्रिया के दौरान कई और समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण परियोजना असफल हो जाता है।

Conclusion on Feasibility Study in Hindi:- सॉफ्टवेयर परियोजना के निर्माण की प्रक्रिया कई अलग-अलग जटिल चरणों से होकर गुजरती है, जिनमें काफी अधिक समय, प्रयास एवं पैसों का निवेश करना पड़ता है। इतने अधिक परिश्रम एवं पैसों को खर्च करने के बाद भी अगर कोई सॉफ्टवेयर परियोजना असफल हो जाए तो इसमें बहुत अधिक नुकसान होता है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि किसी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट के निर्माण को शुरू करने से पहले योजना से संबंधित सभी कारण जो उसे असफल बना सकती है उनका गहराई से विश्लेषण कर लिया जाए जिससे कि प्रोजेक्ट को असफल बनाने वाले सभी कारणों को पहले ही समाधान ढूंढा जा सके। इसी कारण फीज़ेबिलिटी स्टडी एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है, जिसे किसी भी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट को बनाने से पहले किया जाता है।

इस लेख में हमने फीज़ेबिलिटी स्टडी को सरल हिंदी भाषा में समझाने का प्रयास किया है, उम्मीद है कि Feasibility Study in Software Engineering Hindi   का यह लेख आपको पसंद आया होगा। अगर आप इस लेख से संबंधित कोई सुझाव हमें देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं, जिससे कि हम अपने लेख में आवश्यक परिवर्तन करके इसे और अधिक उपयोगी बना सकें।

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