Internet Security in Hindi

Internet Security in Hindi

Definition of Internet Security in Hindi :- इंटरनेट सिक्योरिटी कंप्यूटर सिक्योरिटी की एक सबसे महत्वपूर्ण शाखा है, इसमें ऑनलाइन किए जाने वाले सभी प्रकार के गतिविधियों तथा लेनदेन को सुरक्षित करने के उपायों और रणनीतियों को सम्मिलित किया जाता है।

इंटरनेट सिक्योरिटी उपयोगकर्ता के कंप्यूटर सिस्टम को इंटरनेट के माध्यम से किए जाने वाले विभिन्न प्रकार की गतिविधियां जैसे कि ईमेल एक्सचेंज, वेब सर्फिंग, ऑडियो, वीडियो, इमेज या पीडीएफ आदि फाइलों का आदान-प्रदान या डाउनलोडिंग तथा विभिन्न प्रकार के साइबर अटैक से सुरक्षित करता है।

अगर साधारण शब्दों में कहें तो इंटरनेट सिक्योरिटी यूजर और इंटरनेट के बीच सुरक्षा की एक परत जोड़ देता है, जिससे की कोई भी ऐसा फाइल या वेबसाइट जिससे उपयोगकर्ता को संभावित खतरा हो सकता है, उस तक जाने से रोकता है तथा उपयोगकर्ता जब भी संवेदनशील जानकारी जैसे कि पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड या बैंक से संबंधित निजी जानकारियां किसी वेबसाइट के साथ साझा करता है, तो इन जानकारियों को गुप्त रूप से आदान-प्रदान करने में मदद करता है, इससे कोई भी हैकर या साइबर अपराधी इन जानकारियों को एक्सेस करके उनका दुरुपयोग नहीं कर पता ।

Need of Internet Security in Hindi :- 21वीं सदी में इंटरनेट लोगों की मूलभूत आवश्यकता बन गई। आज के समय में इसका उपयोग केवल जानकारियां ढूंढने के लिए या ज्ञान अर्जित करने के लिए नहीं किया जाता बल्कि इसका उपयोग शॉपिंग, पैसों का आदान-प्रदान, मनोरंजन, चिकित्सा जैसे कई अनगिनत तथा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। लेकिन इंटरनेट की इस दुनिया में कई प्रकार के खतरे भी मौजूद है। इन खतरों से बचाने के लिए इंटरनेट सिक्योरिटी का उपयोग किया जाता है। इंटरनेट पर मौजूद कुछ प्रमुख खतरे निम्नलिखित रुप से हैं:-

Type of Internet Security in Hindi

  • Malware (मैलवेयर):- मैलवेयर एक प्रकार का सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम होता है, इसे हैकर्स तथा साइबर अपराधियों द्वारा उपयोगकर्ता के कंप्यूटर से निजी जानकारियां को चुराने तथा उपयोगकर्ता की गतिविधियों को बाधित करने और उन्हें हानि पहुंचाने के इरादे से बनाया जाता है। मैलवेयर कई प्रकार के होते हैं जैसे कि कंप्यूटर वायरस, कीड़े, ट्रोजन और स्पाइवेयर आदि। साइबर अपराधी उपयोगकर्ता के कंप्यूटर तक इन मैलवेयर को पहुंचाने के लिए कई प्रकार के तकनीकों का उपयोग करते हैं, आमतौर पर इन मैलवेयर को ईमेल, आडियो, विडियो, पीडीएफ डॉक्यूमेंट, फाइल्स के साथ अटैच करके भेज दिया जाता है और जब कोई सामान्य User इन मैलवेयर से संक्रमित फाइलों को अपने निजी कंप्यूटर में डाउनलोड कर लेता है, तो वह हैकर का शिकार बन जाता है।
  • Botnet (बोटनेट) :- बोटनेट निजी कंप्यूटरों का एक नेटवर्क होता है जिसका उपयोग हैकर्स और साइबर अपराधियों द्वारा बड़े पैमाने पर दुर्भावनापूर्ण कार्यों को करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर अपराधी बोटनेट कंप्यूटर में रोबोट या बॉट इंस्टॉल कर देते है तथा ये रोबोट बड़े पैमाने पर संक्रमित मैसेज, स्पैम ईमेल, denial-of-service (DoS) attacks करते है ताकि पुलिस के पकड़ में आए बिना ज्यादा से ज्यादा कंप्यूटरों को अपना शिकार बनाया जा सके।
  • Spam (स्पैम):- स्पैम कई प्रकार के होते हैं लेकिन आमतौर पर इसका उपयोग आपके ईमेल इनबॉक्स के junk mail को संदर्भित करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इन स्पैम ईमेल्स के माध्यम से हैकर सोशल इंजीनियरिंग के विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हुए कोई फ़ाइल या डॉक्यूमेंट के साथ Malware या Virus को जोड़कर यूज़र के कंप्यूटर तक पहुंचाने का प्रयास करता है या फिर उन्हें धोखा देकर पैसे ऐंठने का प्रयास किया जाता है।
  • Phishing (फ़िशिंग):- cyber criminals के द्वारा फ़िशिंग अटैक का उपयोग संवेदनशील जानकारियों को प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है। फ़िशिंग अटैक के द्वारा आपके बैंक क्रेडिट कार्ड, अकाउंट डिटेल जैसे संवेदनशील जानकारियों को चुराने का प्रयास किया जाता है। फिशिंग अटैक के लिए सोशल इंजीनियरिंग का उपयोग किया जाता है अर्थात इसमें लोगों को लालच देकर उनसे विभिन्न प्रकार के निजी जानकारियां निकलवाया जाता है या नकली और फ़र्जी वेबसाइट बनाकर बहुत ही सस्ती कीमतों पर उत्पाद बेचने के बहाने से लोगों के फसाया जाता है। जब लोग लालच में आकर इन फर्जी वेबसाइट से कोई उत्पाद खरीदते हैं तो हैकर उनके अकाउंट और कार्ड की जानकारियां चुरा लेते हैं ।
  • Spyware (स्पाइवेयर ):- स्पाइवेयर एक प्रकार का प्रोग्राम होता है जोकि गुप्त रूप से कंप्यूटर की निगरानी करता है तथा विभिन्न संवेदनशील जानकारियों को दूसरे लोगों तक रिपोर्ट करता है। स्पाइवेयर यह सब उपयोगकर्ता के सहमति और जानकारी के बिना ही करता है। कई बार सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर निर्माता कंपनी जानबूझकर स्पाइवेयर बनाती है तथा उन्हें कंप्यूटर के साथ ही बेच देती है ताकि वह लोगों की जासूसी कर सके। इसके अलावा स्पाइवेयर का उपयोग पुलिस और सरकारी संगठनों द्वारा अपराधी प्रवृत्ति के लोगों की जासूसी करने के लिए भी किया जाता है।
  • Key logging (की-लॉगिंग) :- की-लॉगिंग एक प्रकार के malware है जो किसी कंप्यूटर के कीबोर्ड को हैक करके उस कीबोर्ड द्वारा दबाए गए सभी प्रकार के Key से संबंधित एक रिपोर्ट बनाकर हैकर तक पहुंचाने का काम करता है।

Best Tools for Internet Security in Hindi:- इंटरनेट सिक्योरिटी के लिए उपयोग किए जाने वाले कुछ प्रमुख तकनीक निम्नलिखित रुप से है:-

Method of Internet Security in Hindi

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Internet Security in Hindi

  • Firewall :- फायरवॉल एक नेटवर्क सुरक्षा प्रणाली है जो un-trusted नेटवर्क ट्रैफ़िक को कंप्यूटर तक पहुंचने से पहले ही रोक देता है। फायरवॉल कंप्यूटर और नेटवर्क के बीच एक फिल्टर की तरह काम करता है तथा पूर्वनिर्धारित सुरक्षा नियमों के आधार पर नेटवर्क से कंप्यूटर तक आने वाले और कंप्यूटर से नेटवर्क की ओर बाहर जाने वाले ट्रैफ़िक की निगरानी और नियंत्रण करता है।
  • Internet Security Protocol (IPSec):- यह इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स (IETF) द्वारा डिज़ाइन किए गया नियमों और प्रोटोकॉल का एक समूह है। यह नेटवर्क स्तर पर सुरक्षा प्रदान करता है और IP layer के लिए प्रमाणित और गोपनीय पैकेट बनाने में मदद करता है।
  • Secure Socket Layer (SSL):- यह Netscape Communications Corporation (नेटस्केप कम्युनिकेशंस कॉर्पोरेशन) द्वारा विकसित एक सुरक्षा प्रोटोकॉल है। यह Open Systems Interconnection model (OSI model) के transport layer पर सुरक्षा प्रदान करता है। इसका उपयोग से web-server और समान्य User के कंप्यूटर के बीच होने वाले जानकारियों के आदान-प्रदान को इंक्रिप्ट करने में होता है।
  • Antivirus:- एंटीवायरस एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जिसका उपयोग वायरस और मैलवेयर का पता लगाकर उसे रोकने या हटाने के लिए किया जाता है। अर्थात अगर साधारण शब्दों में कहे तो एंटी-वायरस कंप्यूटर को सभी संभावित खतरों से सुरक्षा प्रदान करते है। आधुनिक एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर उपयोगकर्ता को कंप्यूटर वायरस के आलावा ransomware, adware, spyware, key-loggers, Trojan horses, worms,  Fraud-tools जैसे सभी प्रकार के खतरों से बचता है।
  • Anti-Spyware:- इससे मुख्य रूप से स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया था, लेकिन आधुनिक एंटीवायरस एंटी-स्पाइवेयर का काम कर देता है इसलिए इसका आजकल इसका उपयोग नहीं होता है।
  • Bot-Protection:- हैकर्स कई बार हमारे कंप्यूटर में Bot – Software इंस्टॉल कर देते हैं, ताकि हमारी जानकारी के बिना ही हमारे कंप्यूटर का उपयोग विभिन्न प्रकार के आपराधिक गतिविधि में किया जा सके। Bot Protection सभी प्रकार के Bot – Software से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • Email security :- यह ईमेल से कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करता है तथा अगर किसी ईमेल में viruses, worms, Trojans जैसे कोई सॉफ्टवेयर मौजूद हो तो उन्हें कंप्यूटर्स को प्रभावित करने से पहले ही रोकता है।
  • Multi-factor authentication (MFA):- इसका उपयोग विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल अकाउंट, नेट बैंक जैसे संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है। two factors authentication भी Multi-factor authentication का ही एक भाग है, जिसमें मोबाइल नंबर पर OTP या मैसेज भेज कर उपयोगकर्ता के सत्यता की जांच की जाती है।

Conclusion of Internet Security in Hindi :- 21 वी शताब्दी का मानव समाज की तरफ से इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। हमारी कई दैनिक गतिविधियां आज इंटरनेट पर निर्भर है। शिक्षा, यातायात, संचार, मनोरंजन, और वित्तीय लेनदेन जैसे कई ऐसे अनगिनत काम है जो आज पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर है और बिना इंटरनेट के इनकी कल्पना करना भी मुश्किल है। ऐसे में साइबर अपराधी और हैकर का खतरा भी सामने आता है जो इंटरनेट के माध्यम से किसी दूर देश में बैठकर विभिन्न प्रकार के अपराधों को अंजाम देते हैं। इन अपराधियों को पकड़ना बहुत मुश्किल होता है, ऐसे में जागरूकता एवं एहतियात का पालन करके सुरक्षा खतरों से बचा जा सकता है।

हालांकि बाजार में ऐसे कई प्रकार के टूल्स antivirus, anti-malware प्रोग्राम उपलब्ध है जो कई प्रकार के सुरक्षात्मक हमलों से बचाता है लेकिन साइबर अपराधी धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए विभिन्न प्रकार के हथकंडे अपनाते रहते हैं तथा विभिन्न अपराधों को अंजाम देने के लिए सोशल इंजीनियरिंग और माइंड गेम का सहारा लेते हैं, इसलिए Internet security केवल किसी एंटीवायरस या सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है बल्कि उपयोगकर्ता की जागरूकता पर भी निर्भर करता है।

 

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