software metrics in software engineering in hindi

software metrics in software engineering in hindi

Definition of Software Metrics in Hindi :- सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में Software Metric ( सॉफ्टवेयर मैट्रिक्स ) सॉफ्टवेयर के गणना योग्य विशेषताओं का एक माप है। सॉफ़्टवेयर मेट्रिक्स में सॉफ़्टवेयर के प्रदर्शन, सॉफ़्टवेयर के उत्पादकता, सॉफ़्टवेयर के कार्य की करने की छमता और कई अन्य उपयोगीता को मापा जाता हैं।

सॉफ्टवेयर मैट्रिक्स का लक्ष्य वर्तमान उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार करना और सॉफ्टवेयर विकास परियोजना के पूरा होने के बाद गुणवत्ता के मापदंडों की भविष्यवाणी करना है। मुख्य रूप से software development managers सॉफ्टवेयर मैट्रिक्स की मदद से निम्नलिखित लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करते है :

  • Return on Investment (ROI) में वृद्धि करना।
  • ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना जहाँ सुधार की संभावन है।
  • सॉफ्टवेयर निर्माण के काम से उत्पन्न कार्यभार को प्रबंधित करना।
  • अतिरिक्त समय की बर्बादी को रोकना।
  • सॉफ्टवेयर निर्माण में उपयोग होने वाले विधियों और उपकरणों (Tools) का मूल्य निर्धारण करना ।
  • System के जटिलताओं का आकलन करना।
  • Project निर्माण के कुल लागत को घटाना।

इन लक्ष्यों के मदद से Software Development (सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट) प्रोजेक्ट्स के दौरान लिए जाने वाले निर्णयों के प्रभाव का आकलन करने और सही निर्णयों को चुनकर  उसे प्रबंधकों द्वारा प्राथमिकता देने में मदद मिलती है।

Types of Software Metrics in Hindi

Types of Software Metrics in Hindi :- सॉफ्टवेयर मैट्रिक्स को Software engineering में तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

  • Product metrics (उत्पाद मेट्रिक्स) :- ये उत्पाद की विशेषतायें जैसे की आकार, जटिलता, डिज़ाइन सुविधाएँ, प्रदर्शन और गुणवत्ता स्तर पर निर्भर करते हैं।
  • Process metrics (प्रक्रिया मैट्रिक्स) :- इसका उपयोग सॉफ्टवेयर विकास और रखरखाव में सुधार के लिए, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के दौरान परीक्षण दोष को हटाने के लिए किया जाता है।
  • Project metrics (परियोजना मैट्रिक्स) :- ये परियोजना की विशेषताओं और निष्पादन पर निर्भर करते हैं। उदाहरणों के लिए सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की संख्या, सॉफ्टवेयर लागत आदि परियोजना मैट्रिक्स पर निर्भर है।

Advantage of Software Metrics in Hindi :-

  • इसके मदद से सॉफ्टवेयर के निर्माण के सभी संभावित पद्धति का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। किस पद्धति के उपयोग से सॉफ्टवेयर वनाने पर कितना समय , लगत और अन्य बस्तुओं की जरुरत पड़ने वाली है इसका तुलनात्मक अध्ययन Software Metrics के मदद से किया जाता है।
  • इसके मदद से सॉफ्टवेयर विकास के कार्य में शामिल लोगों की क्षमता और उत्पादकता की तुलनात्मक मूल्यांकन किया जाता है ।
  • सॉफ्टवेयर गुणवत्ता और उपयोगिता के पैमाने को जांचने में इसका उपयोग किया जाता है।
  • सोर्स कोड की जटिलता को जांचने में Software Metrics का उपयोग किया जाता है।
  • सॉफ्टवेयर विकास और रखरखाव लागत के बीच तुलना करने में इसका उपयोग होता है।
  • सॉफ्टवेयर विकास चक्र के विभिन्न चरणों के दौरान प्रगति और गुणवत्ता के बारे में project manager और software analyst को जिस जानकारियों की आवश्यकता होती है वो Software Metrics के मदद से मिलती है ।
  • यह विभिन्न प्रकार के आपदाओं जैसे कि हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर उपकरणो में होने वाली खराबी या वायरस इत्यादि के कारन होने वाली समस्या से निपटने के लिए एक बेहतर बैकअप और रिकवरी की योजना बनाने में मदद करता है।
  • यह सॉफ्टवेयर के रखरखाव पर होने वाले खर्च को काम करता है तथा रखरखाव के लिए एक बेहतर योजना बनाने में भी मदद करता है।
  • बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार सॉफ्टवेयर में नए अपडेट या परिवर्तन करने के लिए एक बेहतर strategy बनाने में मदद करते हैं।

Disadvantage of Software Metrics  in Hindi :-

  • सॉफ़्टवेयर मेट्रिक्स को बनाना आसान नहीं होता है, और कुछ मामलों में, यह बहुत महंगा हो जाता है।
  • सॉफ्टवेयर मेट्रिक्स डेटा पर आधारित है कई बार गणना के लिए जिन डेटा की आवश्यकता होती है वो उपलब्ध नहीं होता।
  • इसके मदद से कर्मचारियों के गुणवत्ता का मूल्यांकन काफ़ी विवास्पद है, क्योंकि एक नया कर्मचारि किसी project में काम करते करते भी अपने Skill को बढ़ा सकता है।

Conclusion on Software Metrics  in Hindi :- सॉफ्टवेयर निर्माण करने के लिए कई अलग-अलग प्रकार के मॉडल उपलब्ध है, लेकिन इन सभी मॉडल में किस मॉडल का चुनाव उस किसी प्रोजेक्ट में करना सही होगा यह पूरी तरह से उत्पाद की जरूरत, बजट और समय की उपलब्धता पर निर्भर करता है। प्रोजेक्ट मैनेजर और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ सॉफ्टवेयर मैट्रिक के उपयोग से विभिन्न सॉफ्टवेयर मॉडल्स के बीच तुलनात्मक विश्लेषण करके यह पता लगाने का प्रयास करते हैं कि इस विशिष्ट प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए किस design एवं module का उपयोग करना अधिक लाभप्रद होगा।

सॉफ्टवेयर एक non-physical उत्पाद है, जो बाजार की बदलती आवश्यकता के अनुसार बदलते रहते हैं। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर निर्माण में उपयोग होने वाले तकनीक भी तेजी से बदलते रहते हैं।  सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए एक सही पद्धति एवं technology का चुनाव Software Development की प्रक्रिया में आने वाले विभिन्न बाधाओं एवं जटिलताओं को कम करके उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया को आसान और अधिक लाभप्रद बना देता है। इसके साथ ही भविष्य में होने वाले परिवर्तन या update और maintenance में भी मदद करता है।

इस लेख में हमने हमने सॉफ्टवेयर मैट्रिक को सरल हिंदी भाषा में समझाने का प्रयास किया है। उम्मीद है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा अगर आप हमें सॉफ्टवेयर मैट्रिक से संबंधित कोई सुझाव देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं जिससे कि हम अपने लेख में आवश्यक परिवर्तन करके इसे और अधिक उपयोगी बना सके।

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