software process model in hindi

What is Software Process Model in Hindi

Definition of Software Process Model in Hindi:-  किसी सॉफ्टवेयर को विकसित करने के लिए की जाने वाली गतिविधियों के समूह को सॉफ्टवेयर प्रोसेस मॉडल या Software Process Model कहते हैं।

सॉफ्टवेयर प्रोसेस मॉडल में किसी सॉफ्टवेयर उत्पाद की जरूरतों का विश्लेषण करने से लेकर, Designing (डिजाइनिंग अर्थात एल्गोरिथम और फ्लोचार्ट लिखने की प्रक्रिया),  Programming (प्रोग्रामिंग अर्थात कोड लिखने की प्रक्रिया) एवं Testing ( टेस्टिंग अर्थात सॉफ्टवेयर में मौजूद गलतियों को ढूंढ़ने की प्रक्रिया) एवं Installation (इंस्टालेशन अर्थात सॉफ्टवेयर को उसके वास्तविक वातावरण में install करने की प्रक्रिया) सभी को अलग-अलग सुपरिभाषित चरणों में विभाजित कर दिया जाता है, जिससे कि सॉफ्टवेयर निर्माण का कार्य बहुत ही आसान हो जाता है |

जैसा कि आप जानते हैं किसी बड़ी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट में एक साथ बहुत सारे लोग काम करते हैं जिसमें system analyst  (सिस्टम एनालिस्ट), software engineers (सॉफ्टवेयर इंजीनियर), software testers (सॉफ्टवेयर टेस्टर) जैसे कई अलग-अलग क्षमता एवं विशेषज्ञता वाले लोग सम्मिलित रहते हैं। Software Process Model प्रोजेक्ट से जुड़े हुए सभी लोगों के काम को अलग-अलग चरणों में विभाजित करता है जिससे कि प्रोजेक्ट से जुड़े हुए सभी लोगों को यह पता होता है कि किस व्यक्ति को कब अपना काम शुरू करना है।

Phases of Software Process Model in Hindi

Four Phases of Software Process Model in Hindi:- सॉफ्टवेयर प्रोसेस मॉडल किसी भी सॉफ्टवेयर के विकास की प्रक्रिया को चार अलग-अलग चरणों में विभाजित करता है, वह चरण निम्नलिखित रुप से है:-

  1. Specification :- इस भाग में System Analyst की एक टीम द्वारा Customer (ग्राहक) की आवश्यकताओं का विश्लेषण करके यह परिभाषित किया जाता है कि सॉफ्टवेयर सिस्टम द्वारा कौन-कौन से काम किया जाना चाहिए।
  2. Design and Implementation:- इस चरण में सॉफ्टवेयर का डिजाइन तैयार किया जाता है जैसे की एल्गोरिथम, फ्लोचार्ट आदि उसके बाद प्रोग्राम का source code लिखा जाता है।
  3. Verification and Validation:- इस चरण के अंतर्गत सॉफ्टवेयर में मौजूद गलतियों को ठीक किया जाता है तथा उसके सुरक्षात्मक क्षमताओं, डेटा Backup और recovery की क्षमता आदि की जाँच किया जाता है। उसके बाद यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि यह सिस्टम ग्राहक की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम है या नहीं।
  4. Maintenance:- कोई भी सॉफ्टवेयर सिस्टम स्थाई नहीं होता। बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार ग्राहक की जरूरतें भी बदलती रहती हैं और इन्हीं बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए सिस्टम में लगातार नए अपडेट या परिवर्तन करने की आवश्यकता होती है।

 

Difference Between Software Development Life Cycle and Software Process Model in Hindi:- कई बार Software Process Model को Software Development Life Cycle (सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफ साइकल) या SDLC के नाम से भी जाना जाता है लेकिन अगर गहराई से देखें तो इन दोनों में काफ़ी अंतर है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफ साइकल कई अलग-अलग पद्धितियाँ या कार्यप्रणालियों को बताता है जैसे की Spiral Model, Incremental development Model, Waterfall Model आदि इनमें से किसी एक का उपयोग सॉफ्टवेयर को विकसित करने के लिए किया जा सकता है लेकिन Software Process Model चार निश्चित चरणों में बाँटा हुआ है, जिनका पालन सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए करना बहुत आवश्यक है। वास्तव में SDLC या सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफ साइकल के अलग-अलग मॉडल्स में भी सॉफ्टवेयर प्रोसेस मॉडल के ही चार चरणों का उपयोग किया जाता है।

SDLC के अंतर्गत आने वाले कुछ प्रमुख्य Software Development Model निम्नलिखित रूप से है :-

Waterfall Model of Software Engineering in Hindi:- वॉटरफॉल मॉडल व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला SDLC का सबसे पुराना मॉडल है। इसमें सॉफ्टवेयर विकास की पूरी प्रक्रिया को कई अलग-अलग चरणों में विभाजित किया जाता है। एक चरण का परिणाम अगले चरण के इनपुट के रूप में कार्य करता है। इसका उपयोग आमतौर पर छोटे एवं सरल परियोजनाओं में किया जाता है। इस मॉडल में किसी चरण के पूरा हो जाने के बाद वापस जाकर फिर से उसी चरण में कोई संशोधन करना काफी मुश्किल हो जाता है इसलिए जटिल प्रोजेक्ट  जिनकी जिसमें उत्पाद की आवश्यकताएं बहुत तेजी से परिवर्तित होती है, उसमें वॉटरफॉल मॉडल का उपयोग नहीं किया जाता है।

Iterative Model in Hindi:- इटरेटिव मॉडल में सॉफ्टवेयर विकास की एक प्रक्रिया को कई अलग-अलग मॉड्यूल या संस्करण में विभाजित किया जाता है। इसके पहले संस्करण में कुछ रिक्वायरमेंट के आधार पर एक पूरा सॉफ्टवेयर उत्पाद बनाया जाता है, उसके बाद के मॉड्यूल में उसी सॉफ्टवेयर में कुछ और नए जरूरतों को जोड़कर उत्पाद को update किया जाता है और इस प्रक्रिया को तब तक दोहराई जाती है जब तक कि पूरा सॉफ्टवेयर बनकर तैयार ना हो जाए।

Agile Model:- एजाइल मॉडल में सॉफ्टवेयर उत्पाद को बनाने की प्रक्रिया को कई अलग-अलग संस्करणों में पूरा किया जाता है। इसके पहले संस्करण से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर इसके आगे के संस्करणों में सुधार किए जाते हैं। यह बहुत तेजी से काम किए जाने वाला मॉडल है जिसका पहला संस्करण बहुत तेजी से बनाकर रिलीज कर दिया जाता है। जब बाजार की बदलती स्थिति के अनुसार ग्राहक की आवश्यकताएं भी बदलती रहती है तब सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए एजाइल मॉडल का उपयोग किया जाता है।

Spiral Model:- यह एक हाइब्रिड मॉडल है जो दो SDLC मॉडल्स को एक साथ किसी प्रोजेक्ट में जोड़ने की अनुमति देता है। आमतौर पर इसमें वॉटरफॉल मॉडल और इटरेटिव मॉडल का उपयोग एक साथ जोड़कर किया जाता है।

Big bang model :- बिग बैंग मॉडल में कोडिंग की प्रक्रिया को बिना किसी योजना के ही प्रारंभ कर दिया जाता है। निर्माण की प्रक्रिया के दौरान कि जब किसी रिक्वायरमेंट के लिए काम हो रहा होता है तब उसे समझने का भी प्रयास किया जाता है। किसी कम बजट वाले छोटे परियोजना के लिए यह पद्धति लाभप्रद है, क्योंकि इसमें प्लानिंग में लगने वाला समय और पैसों को बचाया जा सकता है।

V-Model :- इसे Verification और Validation मॉडल भी कहा जाता है। इस मॉडल में एक तरफ सॉफ्टवेयर के विकास की प्रक्रिया चलती रहती है तथा दूसरी तरफ विकास की प्रक्रिया के दौरान किए गए कामों का test या परीक्षण किया जाता है। अर्थात विकास की प्रक्रिया में जो डिजाइन बनाया जाता है या जो प्रोग्राम कोड लिखा जाता है, उसे साथ-साथ टेस्ट भी कर लिया जाता है।

Advantages of Software Process Model in Hindi :-

  • यह सॉफ्टवेयर विकास के जटिल एवं लंबी प्रक्रिया को सरल, समझने में आसान और अनुसरण करने योग्य बनता है।
  • यह एक साधारण framework प्रदान करता है, जिसका पालन करके software engineering में टीम वर्क करना या ग्रुप में काम करना आसान हो जाता है।
  • पहले ही चरण में विशेषज्ञों के द्वारा ग्राहक की आवश्यकताओं का पूरा विश्लेषण कर लिया जाता है, इसलिए पहले चरण के पूरा होने के बाद ग्राहक की भागीदारी सीमित हो जाती है।
  • यह विकास की प्रक्रिया में लगने वाले समय और पैसे की लगत को कम कर देता है क्योंकि सब कुछ पहले ही एक प्लान के अंतर्गत सुनियोजित कर लिया जाता है।
  • कम अनुभवी एवं शुरुआती लोगों के लिए भी Software Process Model अच्छा चुनाव है क्योंकि इसमें project को प्लान करना बहुत आसान है।

Disadvantages of Software Process Model in Hindi:-

  • सॉफ्टवेयर प्रोसेस मॉडल की पूरी प्रक्रिया किसी बड़ी एवं ज्यादा बजट वाले प्रोजेक्ट के लिए ही कारगर है। किसी छोटे एवं कम बजट वाले प्रोजेक्ट में इन पद्धतियों का उपयोग करने पर यह प्रोजेक्ट के निर्माण में लगने वाले समय और लागत को बढ़ा देता है तथा प्रोजेक्ट को और अधिक जटिल बना देता है।

Conclusion on Software Process Model in Hindi :- सॉफ्टवेयर एक non-physical उत्पाद है जो पूरी तरह से ग्राहक की आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर विकास की प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले तकनीक जैसे कि प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एवं अन्य tools इतनी तेजी से परिवर्तित होते हैं की एक उत्पाद को बनाने में मिलने वाला अनुभव को पुरे तरह से दूसरे उत्पाद पर लागू नहीं किया जा सकता है। यह सब मिलकर Software Development की प्रक्रिया को बहुत अधिक जटिल बना देता है।

लेकिन इन सभी समस्याओं के बावजूद Software Process Model के पद्धतियों के उपयोग से एक सफल योजना बनाकर विकास के काम को कुशलता से पूरा किया जा सकता है। इस आर्टिकल में हमने सॉफ्टवेयर प्रोसेस मॉडल को सरल हिंदी भाषा में समझाने का प्रयास किया है, उम्मीद है कि Software Process Model in Hindi का यह लेख आपको पसंद आया होगा अगर आप इस लेख से संबंधित कोई सुझाव हमे देना चाहते तो निचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं जिससे कि हम अपने लेख में आवश्यक परिवर्तन करके इसे और अधिक उपयोगी बना सके।

 

2

No Responses

Write a response