srs in software engineering in hindi

SRS in Software Engineering in Hindi

Definition of Software Requirement Specification in Hindi:- सॉफ्टवेयर रिक्वायरमेंट स्पेसिफिकेशन  को संक्षेप में SRS कहा जाता है। Software Engineering में इसे कभी – कभी System Requirements Specification ( सिस्टम रिक्वायरमेंट स्पेसिफिकेशन ) के नाम से भी जाना जाता है।

SRS कार्यात्मक और गैर-कार्यात्मक आवश्यकताओं के साथ विकसित किए जाने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम की विशेषताओं और व्यवहार का विस्तृत वर्णन करता है। SRS पूरी तरह से वर्णन करता है कि सॉफ्टवेयर क्या करेगा ? और इससे कैसे प्रदर्शन की उम्मीद करनी चाहिए ।

एक अच्छा SRS परिभाषित करता है कि Software अन्य प्रोग्राम, मानव उपयोगकर्ताओं और Hardware के साथ वास्तविक दुनिया की स्थितियों में कैसा व्यवहार करेगा। Software Requirement Specification में सॉफ्टवेयर संचालन की गति, किसी input के प्रतिक्रिया में output देने का समय, उपलब्धता, पोर्टेबिलिटी, रखरखाव, पदचिह्न, किसी virus या अनचाहे लोगों से सुरक्षा और प्रतिकूल घटनाओं से recovery की गति जैसे मापदंडों का मूल्यांकन किया जाता है।

Need of SRS in Hindi:- सॉफ्टवेयर रिक्वायरमेंट स्पेसिफिकेशन के प्रमुख आवश्यकताएं निम्नलिखित रुप से है:-

  • यह सिस्टम निर्माण से पहले पुरे सिस्टम का एक सारांश रूप प्रस्तुत करता है।
  • इसका उपयोग कस्टमर से feedback लेने के लिए किया जाता है।
  • सॉफ्टवेयर सिस्टम की आवश्यकताओं को समझने में Programmer, Tester सबकी मदद करता है।
  • इसमें उत्पात से future scope अर्थात भविष्य में विस्तार के संभावनाओं के संबंध में वर्णन होता है।
  • यह सिस्टम के security features, backup and recovery आदि के सम्बन्ध में भी बताता है।

Components of SRS in Hindi

Components of Software Requirements Specification in Software Engineering in Hindi:- SRS के प्रमुख घटक निम्नलिखित है :-

  • Need of Business:- यह खंड में उन सभी कारणों का विस्तार से वर्णन होता है, जिनके कारण ग्राहक Software बनवाना चाहता है। वर्तमान सिस्टम में कौन-कौन सी कमियां है जिन्हें ग्राहक दूर करना चाहता है, मतलब कि मौजूदा सिस्टम के कमियों का विस्तृत वर्णन इसमें होता है। इसके अलावा ग्राहक और कौन-कौन से नए विशेषताएं को System में जोड़ना करना चाहता है ये भी Business drivers में होता है।
  • Business Model:- इस खंड में ग्राहक के व्यवसाय संचालन योजना या बिजनेस मॉडल का वर्णन होता है। मतलब सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता किस प्रकार का काम करता है? उनके आय का स्त्रोत क्या है ?  वह कोई सेवा देता है या किसी वस्तु का निर्माण करता है? उसके ऑर्गेनाइजेशन में कितने लोग काम करते हैं? इस प्रकार के बातों का विस्तृत वर्णन इस खंड में होता है।
  • Business/functional and system requirements:- इस खंड में श्रेणीबद्ध तरीके से शीर्ष स्तर पर व्यावसायिक आवश्यकताएं और उनके निचे system की कार्यात्मक आवश्यकताओं को लिखा जाता है।
  • Business and System Use Cases:- इस खंड में आमतौर पर Use Case diagram होता है। use case diagram सिस्टम के कार्यक्षमता को रेखा-चित्र और आकृति के मदद से दर्शाती है।
  • Technical Requirements:- Software उत्पाद को संचालित करने के लिए जिस तकनीकी वातावरण की उसका विवरण इस खंड में होता है। पुरे प्रोजेक्ट को बनाने में हो सकने वाले संभावित तकनीकी बाधाओं का भी पूरा विवरण इसमें होता है।
  • System Qualities:- इस भाग में सिस्टम की गुणवत्ता जैसे की विश्वसनीयता, उपलब्धता, मापनीयता, सेवाक्षमता, सुरक्षा और स्थिरता इत्यादि को परिभाषित किया जाता हैं।
  • Constraints and assumptions:- ग्राहक की आवश्यकताओं को पूरा करने में आ सकने वाले किसी भी प्रकार की बाधा का वर्णन किस भाग में किया जाता है, साथ ही प्रोजेक्ट के बारे में इंजीनियरिंग टीम की धारना कैसी है इसका वर्णन भी इस भाग में किया जाता है।
  • Acceptance criteria:- यह खंड उन मानदंडों का वर्णन होता है जो ग्राहक को अंतिम Software समर्पित करने से पहले पूरा होना चाहिए।

Characteristics of a Good Software Requirement Specification in Hindi :-

  • Correctness:- किसी SRS को तब सही कहा जाता है, यदि उसमे उन सभी आवश्यकता को शामिल किया गया है, जो वास्तव में ग्राहक द्वारा सिस्टम से अपेक्षित हैं। एसआरएस को बनाने के बाद इसकी समीक्षा के लिए इसे ग्राहक के पास जरूर भेजना चाहिए इससे SRS के शुद्धता की जांच होती है।
  • Completeness:- एक पूर्ण SRS में सभी कार्यात्मक और गैर कार्यात्मक समस्याओं का वर्णन होना चाहिए और इन समस्याओं के समाधान कैसे किए जाएंगे इसका वर्णन भी होना चाहिए।
  • Consistency:- SRS में वर्णित अलग-अलग समस्याओं के समाधान के बीच में किसी भी प्रकार का आपसी मतभेद या तार्किक संघर्ष नहीं होना चाहिए।
  • Modifiability:- SRS में यथासंभव संशोधन करने की संभावना होनी चाहिए।
  • Verifiable:- SRS डॉक्यूमेंट में प्रलेखित सिस्टम की सभी आवश्यकताएं verify या सत्यापित करने योग्य होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि यह ज्ञात होना चाहिए की किन संख्याओं, तथ्यों और कुछ मापने के मापदंडों के उपयोग से एसआरएस डॉक्यूमेंट में लिखे आवश्यकताओं को वेरीफाई करना है।
  • Understandable by the customer:- SRS की भाषा को इतना आसान और स्पष्ट रखा जाना चाहिए की उपयोगकर्ता इसे आसानी से समझ सके । इसलिए SRS  में औपचारिक संकेत और प्रतीकों के उपयोग को जितना संभव हो उतना कम करना चाहिए ।
  • Ranked for importance and/or stability:- हालांकि एसआरएस में लिखे हुए सभी आवश्यकताएं महत्वपूर्ण होती है। लेकिन कुछ आवश्यकताएं दूसरे आवश्यकताओं की तुलना में अधिक जरूरी होते हैं तथा उन्हें दूसरों की तुलना में जल्दी से जल्दी पूरा किया जाना चाहिए। इसी कारण अगर एसआरएस में सभी आवश्यकताओं को उनके महत्व और जरूरत के अनुसार एक Rank दिया जाए तो ऐसे एसआरएस को समझना काफी आसान हो जाता है।
  • Traceable :- एसआरएस में लिखे गए सभी requirement का उसके स्त्रोत के साथ वर्णन किया जाना चाहिए, अर्थात किस कारण से किसी रिक्वायरमेंट को सॉफ्टवेयर सिस्टम में जोड़ा जाना चाहिए इसका वर्णन विस्तार से किया जाना चाहिए।
  • Unambiguous :- आवश्यकताओं की व्याख्या को सरल भाषा में विस्तार से किया जाना चाहिए, ऐसा ना हो कि उन्हें पढ़कर कोई भ्रम उतपन्न हो जाए। इसमें pictures, tables, charts, statistical data को भी सम्मिलित करना चाहिए यह जानकारियों को बेहतर तरीके से समझने में मददगार होते हैं

Advantage of SRS in Hindi:-

  • सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी ग्राहक के मुद्दों को अच्छे तरीके से समझती है, इसके आश्वासन के लिए सॉफ्टवेयर बनाने से पहले ग्राहक को Software Requirement Specification की एक कॉपी दी जा सकती है।
  • सभी आवश्यकताओं का एक लिखित दस्तावेज होने से सॉफ्टवेयर Manager, Developer, Tester सब को बहुत अधिक सहायता मिलती है।
  • इसमें सिस्टम के सभी कार्यात्मक और गैर-कार्यात्मक आवश्यकता को परिभाषित किया जाता है।
  • सॉफ्टवेयर सिस्टम को बनाने के बाद ग्राहक को कौन-कौन से फायदे होंगे इसका वर्णन एसआरएस में होता है जोकि ग्राहक या client के संतुष्टि को बढ़ता है।
  • सॉफ्टवेयर सिस्टम किस प्रकार से काम करेगा तथा डाटा को किस प्रकार से प्रबंधित किया जाएगा इससे संबंधित साधारण जानकारी भी एसआरएस में होती है।
  • SRS के माध्यम से किसी बड़े समस्या को छोटे हिस्सों में तोड़कर समझने में मदद मिलती है।
  • SRS किसी प्रकार के संभावित भूल से भविष्य में उत्पन्न होने वाले समस्याओं से बचाता है, क्योंकि ये गलतफहमी को प्रारंभिक चरण में समाप्त कर देता है।
  • यह software engineering के काम को आसान बना देता है क्योंकि developer को सिस्टम के कार्य क्षमता से संबंधित एक सूची मिल जाती है।
  • सॉफ्टवेयर सिस्टम का future scope क्या है ? अर्थात भविष्य में इसके विस्तार करने की सभी संभावनाओं का वर्णन इसमें होता है।
  • Software Requirement Specification में सॉफ्टवेयर सिस्टम के सुरक्षात्मक क्षमताओं का भी वर्णन होता है।
  • SRS यह भी बताता है कि किसी आपदा की स्थिति में अर्थात हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर के फेल हो जाने पर Backup और Recovery के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

Conclusion on SRS in Software Engineering in Hindi :-  सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में SRS को Software Development Life Cycle ( सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफ साइकिल ) या SDLC के सबसे पहले अर्थात Requirements gathering और analysis वाले चरण के अंतर्गत ही विकसित कर लिया जाता है। जब system analyst ग्राहक के आवश्यकताओं का विश्लेषण करके यह समझने का प्रयास करते हैं कि ग्राहक नए सॉफ्टवेयर सिस्टम से अपनी कौन-कौन की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहता है उसके बाद system analyst के द्वारा ही Software Requirement Specification का भी निर्माण किया जाता है।

जब ग्राहक को SRS की document मिलती है तो वह इसे पढ़कर समझ सकता है कि सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी उनके समस्याओं को ठीक से समझने में सक्षम है या नहीं। इसके साथ ही अगर ग्राहक किसी नए विशेषताओं को सॉफ्टवेयर में जोड़ना चाहता है जिसे system analyst के द्वारा नहीं जोड़ा गया हो तो वह परिवर्तन की मांग कर सकता है। यह बहुत आवश्यक है कि Software Development के काम को शुरू करने से पहले ही सॉफ्टवेयर निर्माता और ग्राहक दोनों के बीच की सभी गलतफहमीओं को दूर कर जाये क्योंकि अगर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के काम को शुरू करने के बाद या सॉफ्टवेयर को बनकर तैयार हो जाने के बाद अगर ग्राहक उससे संतुष्ट नहीं हो पाया तो बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है और बहुत अधिक समय और पैसे का भी नुकसान हो सकता है।

इस लेख में हमने Software Requirement Specification को सरल हिंदी भाषा में समझाने का प्रयास किया है। उम्मीद है की SRS in Software Engineering in Hindi का यह लेख आपको पसंद आया होगा। अगर आप इस लेख से संबंधित कोई सुझाव हमें देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं जिससे कि हम अपने लेख में आवश्यक परिवर्तन करके इसे और अधिक उपयोगी बना सकें।

 

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